Women are strong, powerful and invincible. With thousands of mantras encouraging women's existence every day, a special day is indeed a necessity to celebrate women's achievements in all aspects of life. Whether she's a teacher, homemaker, economist, engineer or pioneer, women have been making the world a better place with their infinite strength, determination and belief. With power enough to shatter the shackles of patriarchy, women are rising above societal hurdles every single day, making them a stronger force to reckon with, in modern times. This International Women's Day, we are celebrating and rejoicing the social, economic, cultural and political achievements of women all over the world. The day also marks a call to action for accelerating gender parity. As all women come together, significant activity is witnessed worldwide to celebrate women's achievements or rally for women's equality.
भारत के राष्ट्रपति के सूचि में पहला नाम डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का आता है। जो भारतीय संविधान के आर्किटेक्ट और आज़ाद भारत के पहले राष्ट्रपति भी थे। आजादी के करीब 3 साल बाद 1950 में हमारे देश में संविधान लागू होने के बाद उन्हें देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के पद पर सुशोभित किया गया था।
राजेन्द्र प्रसाद जी एक ईमानदार, निष्ठावान एवं उच्च विचारों वाले महान शख्सियत थे, उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में सर्मपित कर दिया था।.......आगे 👇
12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस है। प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्म-दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। विश्व भर में सर्वाधिक प्रसिद्ध दार्शनिकों एवं माँक में से एक स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था। भारत सरकार द्वारा वर्ष 1984 में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाये जाने की घोषणा यह कहते हुए की गयी थी कि स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं आदर्शों को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इसके बाद वर्ष 1985 से हर वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर मनाया जाता है।
स्वामी विवेकानंद के विचार -:
उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो। तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो। तुम तत्व नहीं हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो।
••• मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं।
यदि परिस्थितियों पर आपकी मजबूत पकड़ है तो जहर उगलने वाला भी आपका कुछ नही बिगाड़ सकता।
यह मत भूलो कि बुरे विचार और बुरे कार्य तुम्हें पतन की और ले जाते हैं । इसी तरह अच्छे कर्म व अच्छे विचार लाखों देवदूतों की तरह अनंतकाल तक तुम्हारी रक्षा के लिए तत्पर हैं ।
••• संभव की सीमा जानने का एक ही तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।
हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।
••• हम भगवान को खोजने कहां जा सकते हैं अगर उनको अपने दिल और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते।
हमे ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण हो, मन की शक्ति बढ़े, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैर पर खड़ा हो सके।
••• तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना है। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही है। आपकी अपनी आत्मा के अलावा कोई दूसरा आध्यात्मिक गुरु नहीं है।
••• अनुभव ही आपका सर्वोत्तम शिक्षक है। जब तक जीवन है सीखते रहो।
••• शिक्षा का अर्थ है उस पूर्णता को व्यक्त करना जो सब मनुष्यों में पहले से विद्यमान है।
आप अपने को जैसा सोचेंगे, आप वैसे ही बन जाएंगे। यदि आप स्वयं को कमजोर मानते हैं तो आप कमजोर ही होंगे। और यदि आप स्वयं को मजबूत सोचते हैं तो आप मजबूत हो जाएंगे।
••• केवल उन्हीं का जीवन, जीवन है जो दूसरों के लिए जीते हैं। अन्य सब तो जीवित होने से अधिक मृत हैं।
••• आकांक्षा, अज्ञानता और असमानता – यह बंधन की त्रिमूर्तियां हैं।
उठो, जागो और जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये तब तक मत रुको।
••• एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
••• ज्ञान का प्रकाश सभी अंधेरों को खत्म कर देता है।
••• दिन में कम से कम एक बार खुद से जरूर बात करें अन्यथा आप एक उत्कृष्ट व्यक्ति के साथ एक बैठक गँवा देंगे।
••• जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप ईश्वर पर विश्वास नहीं कर सकते।
••• पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता। एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान। ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है।
••• जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिये, नहीं तो लोगो का विश्वास उठ जाता है।
••• ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है।
••• जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।